एक नजरिया जिंदगी की ओर। A view towards life




आज मै जिंदगी को एक कविता के माध्यम से प्रस्तुत करना चाहता हूं। क्युकी हर किसी के लिए जिन्दगी जीने का माइन अलग- अलग होता है।
कोई तो छोटी - छोटी बातो में खुशी डूढ़ लेता है, तो कोई खुशी के आने का इंतजार करता है, और जिंदगी कटती जाती है पर शायद ही उसे.....।


कभी संसो की डोर पर चलती जिन्दगी
कभी रिश्तों तो कभी धूप की डोर में चलती जिन्दगी।
सुबह एक आश थी जिन्दगी,
तो शाम को बुझता दिया थी जिन्दगी।
बच्चों के लिए उम्मीद थी जिन्दगी,
मा बाप के लिए बच्चो के सपने हैं जिंदगी।
बूढों के लिए बुझती लाॅ हैं जिंदगी।
हर कोई जी रहा हैै जिंदगी
पर जिंदगी को ही पता है ,
 अशल में कौन जी रहा है जिन्दगी।
कोई कड़कती सर्दी में,
सड़क में जी रहा है जिंदगी।
तो कोई झुलसती धूप में जी रहा है जिन्दगी।
अशल में हम जी नहीं रहे जिंदगी,
काट रहे है जिंदगी।
अगर कभी मिला मै जिंदगी से,
तो पूछूंगा उस से तू चाहती क्या हैं।
पर एक दिन दिल से आवाज आई,
जो तू चाहता है, मै वो ही हूं जिंदगी।

 



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