जिंदगी जीने की कला। Art of living.



मै सोच रहा हूं, कहां से शुरू करे। क्योंकि ये विषय थोड़ा अलग हैं। ठीक है आप से ही पूछ लेता हूं, मेरा एक सवाल है,सब लोगों से। 
क्या आप सच में जी रहे हो या जिन्दगी कट रही है?
चलो अब इस पर बात करे।

जिन्दगी कट क्यू रही है, जिंदगी जी क्यू नहीं रहे?

चलो इसको विस्तार से समझे, लेकिन ध्यान रखना मैं यह बात उस व्यक्ति के बारे में कर रहा हूं, जिसके साथ सब कुछ ठीक-ठाक हो रहा हो, नहीं तो फिर कहना ही क्या।
 आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी मैं हर इंसान के पास बहुत सारी जिम्मेदारियां है, जैसे बच्चों की जिम्मेदारी है घर की जिम्मेदारियां जॉब की रिस्पांसिबिलिटी सामाजिक कर्तव्य ऐसी बहुत सारी जिम्मेदारियां हैं जो हर व्यक्ति को निभानी पड़ती है। कई तो ऐसे जिम्मेदारी होती है, जिनको ना चाहते हुए भी करना पड़ता है।
अब हम इन सारी बातों को एक बच्चे की जिंदगी के साथ जोड़कर देखते हैं,
जब बच्चा पैदा होता है, तब से लेकर बुढ़ापे तक वह संघर्ष करता रहता है। बच्चा जब पैदा होता है, वह चलने के लिए संघर्ष करता है, बोलने के लिए संघर्ष करता है, सीखने के लिए संघर्ष करता है, समझने की कोशिश करता है। फिर जैसे वह 5 साल का होता है, तो उसके ऊपर पढ़ाई का दबाव आ जाता है। फिर जब उसकी स्टडी पूरी हो जाती है, तो फिर जॉब के लिए टेंशन हो जाती है। और अगर जॉब मिल जाती है, तो फिर घर की जिम्मेदारियां, खुद की शादी, सामाजिक समारोह आदि बहुत सारी जिम्मेदारियों को निभाना पड़ता है।
शादी होने के बाद उसकी और जिम्मेदारियां बढ़ जाती है। अब यहां पर होता यह है एक तो खुद की जिम्मेदारियां, माता-पिता की देख देख, भाई-बहन की पढ़ाई, दूसरी तरफ अपनी बीवी बच्चों का ख्याल रखना। उनके भविष्य के बारे में सोचना, और जब उसका बच्चा बड़ा हो जाए तो उसकी जॉब के लिए भी टेंशन लेना।
दूसरी तरफ सुबह सुबह उठ के ऑफिस जाना। और देर रात को घर लौटना बच्चों के साथ भी ठीक से बात नहीं कर पाना, बस रोज की वही दिनचर्या और पूरी उम्र गुजर जाती है। मान लो किसी ने पैसे भी काफी कमा लिए तो वैसे भी बीमारियों में ही खर्च हो जाते हैं।
जरा सोचिए जब आदमी कुछ अच्छा खाना चाहता है कुछ अच्छा पहनना चाहता है तब उसके पास पैसे नहीं होते हैं, और जब उसके पास पैसे होते हैं। तो बीमारियों की वजह से वह कुछ खा नहीं पाता कुछ अपनी मर्जी का कर नहीं पाता बस जिंदगी कटती जाती है।
आपने कभी सोचा है ऐसा क्यों हो रहा है, अब इसको समझने की कोशिश करते हैं।

एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा।

इसका एक मुख्य कारण यह है, एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा हो गई है। एक दूसरे को देख कर उसकी लाइफ स्टाइल को जीने की कोशिश करते हैं चाहे कंडीशन कोई भी हो, आप यह समझ लो आप खुद कि नहीं दूसरे की जिंदगी जी रहे हो जिसके बारे में हमें कुछ पता ही नहीं कि वह क्या सोचता है वह क्या चाहता है वह क्या कर रहा है तो क्या हम ऐसी जिंदगी जी के खुश रह पाएंगे? बिल्कुल भी नहीं, अगर कोई नई कार लाता है तो दूसरों को भी उसकी बराबरी करनी है, अगर कोई घूमने जाता है तो उसको भी जाना है। वह यह नहीं सोचता किसकी प्रास्थिति कैसी है। बस उसको तो दूसरे की बराबरी करनी है। आजकल की जिंदगी में यही सब होता आ रहा है। तो ऐसे नहीं आदमी जिएगा नहीं जिंदगी को काटेगा।


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खुश रहने के लिए किसी खास पल का इंतजार करना।

आजकल की दिनचर्या कुछ ऐसी हो गई है कि लोगों को पास खुद का मनन करने का समय भी नहीं है। बस हम जिंदगी में एक लक्ष्य से दूसरे लक्ष्य सेट करते जाते हैं। हम खुश रहने के लिए किसी खास पल का इंतजार करते हैं और जब वह पल आता है तब अक्सर उस समय कुछ ऐसा घटित हो जाता है कि हम वह पल भी नहीं जी पाते। और फिर जो खुशी के छोटे-छोटे पल होते हैं हम उनको भी नहीं जी पाते। और समय कटता जाता है।

समाज के नजरिए से जीना।

हमारी सबसे बड़ी गलती यह है कि हम दूसरे के नजरिए से जीते हैं। हम खुद क्या चाहते हैं वो करना तो चाहते हैं लेकिन समाज क्या बोलेगा फिर रुक जाते हैं। एक तरीके से हम दिखावटी जिंदगी जी रहे हैं , हमने अपनी जिंदगी समाज और कुछ लोगों पर छोड़ दी है जैसा वह चाहते हैं हम वैसे ही जीते हैं। तो क्या हम ऐसे में खुश रह पाएंगे?

अब प्रश्न यह है आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में अगर बराबरी में रहना है तो यह सब करना पड़ेगा। लेकिन इसके साथ साथ हम जिंदगी जिए कैसे ? अब इसमें विस्तार से बात करते हैं।

अपना नजरिया बदलो।

अगर आपको जिंदगी जीनी है तो आपको अपना नजरिया बदलना पड़ेगा। और यह कोई बड़ी बात नहीं है बस थोड़ा समझने की जरूरत है।
पहले तो हमें यह सोचना होगा हम इतनी मेहनत करते हैं किसके लिए करते हैं दूसरों के लिए या अपनों के लिए या खुद के लिए। बिल्कुल अपने और अपने परिवार के लिए, तो बस तुम्हारे पास जो भी है उसका सही से इस्तेमाल करो। जिंदगी को किस्तों में नहीं रोज जीने की कोशिश करो छोटे-छोटे पलों को महसूस करो आगे क्या होगा वह तुम्हारे सोचने से बदलने वाला नहीं है तो अपनी जिंदगी जियो।
मैं तुम्हें यह नहीं कह रहा कि अपनी जॉब चेंज करो या समाज के साथ रिश्ते-नाते खत्म कर दो, बस मैं यह कह रहा हूं कुछ बड़ा पाने के लिए अपनी छोटी छोटी खुशियां खत्म मत करो। कहीं फिर ऐसा ना आए कि आप किसी जगह पर बैठकर यह सोच रहे होंगे काश उस समय में यह कर पाता, तो जिंदगी जीने का मजा ही कुछ और होता है। इसलिए हर पल को जियो समय का इंतजार मत करो समय के साथ तुम कभी नहीं चल पाओगे एक दिन थक जाओगे। इसलिए समय के साथ जीना सीखो।

समाज क्या सोचता है, दूसरा भी यही सोचता है।

आज का सबसे बड़ा कारण यही है। कि अगर हम कुछ करना चाहते हैं, तो उससे पहले हम सोचते हैं कि दूसरे लोग क्या बोलेंगे, यकीन मानिए दूसरे लोग भी यही सोचते हैं कि दूसरे क्या सोचते हैं। और बस हम एक दूसरे की इसी सोच के वजह से आगे बढ़ते जाते हैं और कुछ नहीं कर पाते।
मान लो कोई आपके बारे में कुछ बोलता है, तो क्या वह आपकी हेल्प कर रहा है, या आपकी परेशानियों को समझ रहा है, वह केवल बोल सकता है। करना आपको ही होता है। इसलिए दूसरों की बातों को इतनी सीरियस लेने की जरूरत नहीं है, बस अपने अंदर की भावनाओं को ढूंढो आप क्या करना चाहते हो इस बारे में सोचो आप को जिस में खुशी मिलती है वह करो, लेकिन हमेशा याद रखो हर चीज का एक दायरा होता है उसे कभी पार मत करो जिस दिन आप वह पार कर लोगे आप खुद की नजरों से, समाज की नजरों से गिर जाओगे। और उस दिन आप अकेले होंगे आप को संभालने वाला कोई नहीं होगा।

छोटी छोटी चीजों पर जीना सीखो।

हम अक्सर छोटी-छोटी बातों को इग्नोर कर देते हैं। और हम यह सोच लेते हैं जब कोई खास पल आएगा उस समय हम खुश होंगे उस समय मैं अपनी जिंदगी जिएंगे। लेकिन अक्सर होता क्या है उस समय कुछ न कुछ ऐसी समस्याएं आ जाती है, कि हम वो पल भी नहीं जी पाते। इसलिए जिंदगी में हर पल छोटी-छटी चीजें होती रहती है, उनको इंजॉय करो परिवार के लिए कुछ समय निकालो बच्चों के साथ मस्ती करो। एक दूसरे के दुख दर्द को समझो। असल में जीना यही जीना है, कभी भी भविष्य के बारे में इतना मत सोचो कि वर्तमान खराब हो जाए इसलिए वर्तमान में जियो, भविष्य अपने आप अच्छा हो जाएगा।

वर्तमान में जीना सीखो।

अक्सर हम जो पल बीत गया इसके बारे में सोचते हैं, या भविष्य में में क्या होगा, उसके बारे में सोचते हैं। लेकिन वर्तमान में कभी नहीं जीते।
एक पल के लिए सोचिए अगर हम एक एक स्टेप करके वर्तमान में सही आगे बढ़ते जाए तो हमारा भविष्य अपने आप अच्छा हो जाएगा। और वैसे भी हमारा ज्यादा सोचने से भविष्य नहीं बदलने वाला इसलिए वर्तमान में जो हो रहा है उसे महसूस करो उसे जिओ। जिंदगी जीना एक कला है। उसको बस पहचानने की जरूरत।


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