जिंदगी क्या हैै।





जिंदगी क्या है?

जिंदगी में सुख और दुख की निरंतर एक प्रक्रिया चलती रहती है। जिससे कोई नहीं बच पाता, अगर कोई आज बहुत खुश है सुखी है तो ऐसा नहीं है कि उसके पास अब दुख और सुख नहीं आएगा, एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिस तरह से हर रात के बाद सवेरा होता है, उसी तरह सुख के बाद दुख आना स्वाभाविक है

जिंदगी निरंतर चलनेेे वाली प्रक्रिया है। जिस तरह मौसम बदलता है और सारे पेड़ पौधे जीव जंतु उसको अपने अनुरूप अपने आप को ढाल लेते हैं, उसी प्रकार जीवन में भी कभी सुख कभी दुख की प्रक्रिया चलती रहती है बस समय के साथ हमें इसके अनुरूप ढलना पड़ता है और जिंदगी निरंतर चलती रहती है।


जिंदगी हमारी गुरु है।

जिंदगी हमें हर पल कुछ ना कुछ सिखाती रहती है। जो कि हम जाने अनजाने में अपने जिंदगी जीने में उसको अमल करते हैं।
जिंदगी हमेशा कुछ न कुछ सिखाती रहती है। चाहे वह पेड़ पौधों से हो, चाहे वह जीव जंतुओं से हो, बस हमें अपने देखने का नजरिया बदलना है
मान लो कि तुम्हें पता हो जिंदगी में तुम्हारे साथ हर समय सब कुछ अच्छा ही होना है, तो क्या तुम्हें जीने में मजा आएगा? तुम कुछ समय में ही है बोर हो जाओगे। चलो इसको एक उदाहरण के तौर पर समझते हैं।
मान लो तुम एक कमरे में बैठे हो तुम्हें जो चाहिए वह तुम्हारे सामने आ जाता है तुम्हें कुछ नहीं करना पड़ेगा यहां तक कि जो चीजें तुम्हें इंपॉसिबल लग रही है वह भी होने लगे और तुम जिंदगी का बस आनंद लेते जा रहे, हो तो तुम ऐसी जिंदगी कब तक जी पाओगे जब सब कुछ अपने आप हो रहा है और तुम्हें सब कुछ पता है कि यह होने वाला है जिंदगी जीने का मतलब ही क्या रह गया, जिंदगी में जो बदलाव होते रहते हैं और हमें उनके अनुसार डरना पड़ता है और जीना पड़ता है इसी का नाम जिंदगी है।

जिंदगी को कैसे जाने।

जिंदगी को अगर तुम समझना चाहते हो उसका एक आसान तरीका है, वह कुछ खास पैटर्न के अनुसार आगे बढ़ती जाती है बस हमें उस पैटर्न को समझना होता है।
मान लो तुम्हारी जिंदगी में सबसे खराब पर चल रहे हैं यह मान कर चलो कि उससे खराब अब नहीं हो सकता तो इसका मतलब क्या है जब इससे खराब कुछ नहीं हो सकता तो आगे कुछ अच्छा ही होने वाला है बहुत अच्छा भी ना हो लेकिन इस खराब पल से तो अच्छा होने वाला है।
जब हमारे साथ हर समय कुछ खराब घटनाएं ही होती रहती है तो इसका मतलब यह नहीं कि सब कुछ खत्म हो गया। जब हम जिंदगी में आगे बढ़ते जाते हैं तो एक समय वह आता है जब सब अचानक बदल जाता है। और आपको लगता है कि यह जो भी हुआ एक पल में हुआ, यह जो आप सोच रहे हैं कि यह एक पल में हुआ यह बिल्कुल गलत है। आप जब पीछे मुड़कर देखते हो और आपके साथ जो भी घटनाएं हुई जो भी बुरा हुआ उन बिंदुओं को मिलाते जाओ तुम पाओगे अगर तुम्हारे साथ यह घटनाएं नहीं होती तो शायद तुम आज इस मुकाम पर नहीं होते असल में वह घटनाएं बिंदु बिंदु करके, हमारे लिए एक रास्ता बनाती जाती है। जो हमें आगे चलकर नजर आता है।

जिंदगी को एक कविता के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं।

जिंदगी कभी धूप है तो कभी छांव है
कभी कड़कती धूप में, बारिश की बूंदों के साथ गिरते मोती हैं।
तो कभी हवा की तरह बस महसूस करते हुए निकल जाए वह भी जिंदगी है।
तो कभी कड़कती धूप में एक जगह पर ठहर जाए वह भी है जिंदगी।
तो कभी उसी धूप में बैठकर जिंदगी का आनंद लेना वह भी है जिंदगी।
कभी बसंत ऋतु में खेत खलियान ओं में लहराते पेड़ पौधे
तो कभी पतझड़ में वीरान पड़े हुए खेत खलियान वह भी है जिंदगी।
किसी के लिए फूलों की तरह है जिंदगी,
 तो किसी के लिए पैरों पर छाले पड़े हैं जिंदगी।
मां बाप के लिए बच्चे हैं जिंदगी,
तो बच्चों के लिए अपने सपने हैं जिंदगी।
बूढ़ों के लिए बस यादें हैं जिंदगी,
नौजवानों के लिए कुछ कर गुजर ना है जिंदगी।
पेड़ पौधों के लिए बारिश है जिंदगी,
तो कुछ कीट पतंगों के लिए वहीं बारिश मौत है जिंदगी।
इंसान के लिए नदी समुद्र वही मौत है जिंदगी,
तो वही मछलियों के लिए एक जीवन है जिंदगी।
किसी के लिए कुछ कर गुजर ना है जिंदगी,
तो किसी के लिए बैठे-बैठे ही गुजारना है जिंदगी।
बस अगर मैं कुछ शब्दों में कहूं,, कि क्या है जिंदगी,
तो बस यही कहूंगा अपना अपना नजरिया है जिंदगी।

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