समाज में बढ़ता, मानसिक रोग। An increasing mental disease in the society.





मानसिक रोग क्या है।
जब कोई व्यक्ति सामान्य, व्यक्ति की तुलना में असमान्य ( दैनिक दिनचर्या, व्यव्हार , सोच में बदलाव )पाया जाता है। इसको मानसिक रोग , मानसिक विकार कहा जाता है।

मानसिक रोग के लक्षण।

आम तौर पर हर व्यक्ति कुछ समय के लिए परेशान, चिन्तित रेहेता है। लेकिन उस व्यक्ति को हम मानसिक रोग की कैटेगिरी में नहीं रख सकते।
अगर को व्यक्ति लंबे समय से तनावग्रस्त रहता है, और उसके व्यवहार में बदलाव आता है तो हम बोल सकते है कि ये व्यक्ति मानसिक रोग से विकृत है।
मानसिक रोग के अलग अलग लक्षण है। जैसे-
हर समय नेगेटिव सोचते रहना, मूड स्विंग होना, आत्म विश्वास की कमी, हर समय चिंता करते रहना ,नींद में कमी, अपने आप को दोष देना, वजन पढ़ना या कम होना, काम में मन नहीं लगना, चिड़चिड़ापन, व्यवहार में बदलाव इत्यादि।

मानसिक रोग के कारण।

मानसिक रोग के अनेक कारण है। जैसे-
आनुवंशिक कारण, कोई दुर्घटना के कारण, रिलेशन शिप टूटने के कारण, पारिवारिक माहौल ठीक ना होना, सामाजिक ठेश , परिवार में किसी प्रिया कि मृत्यु, खान पान में बदलाव इत्यादि।
मस्तिष्क  में अनेक रसायन होते हैं। जब भी हमारी सोचने समझने का नजरिया बदलता  है, तो इन रसायनों के स्तर में कमी या ज्यादा होने की वजह से मानसिक विकार होता है। जैसे- सेरोटोनिन, डोपामाइन, एंड्रो फिंश, नोरेड्रिनेलिंन।

समाज में मानसिक रोग के प्रति अवधारणा।

आज भी हमारे देश में मानसिक रोग के प्रति देखने का नजरिया अलग ही है। लोग इसे दूसरे नजरिए से देखते हैं, इसी डर से लोग इसका इलाज करवाने में शर्म महसूस करते हैं और यह भी एक मुख्य कारण है जिससे हमारे देश में मानसिक रोग बढ़ता ही जा रहा है। लोग ऐसे मरीजों के प्रति भेदभव रखते हैं। लोग इसको अलग बीमारी समझते हैं।
       यह बीमारी भी अन्य बीमारियों की तरह ही है इसका इलाज संभव है आजकल मेडिकल साइंस काफी तरक्की कर चुका है।और इस बीमारी का अच्छे से इलाज करते हैं। इस रोग से पीड़ित लोगों के साथ सामान्य व्यवहार किया जाना चाहिए,यह न कोई छुआछूत की बीमारी है और न कोई लाइलाज बीमारी है इस प्रकार के रोगी की भावनाओं को समझना जरूरी है। और उसी तरह उसकी देखभाल की जानी चाहिए।
   
आजकल  युवा वर्ग में मनोरोग देखने को मिल रहा है। जिसकी कई वज़ह है।

1- स्टडी का दवाब-

आजकल बच्चो मै स्टडी को के कर बहुत ज्यादा दबाव देखने को मिल रहा है। आजकल बच्चे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अत्यधिक मेहनत करनी पड़ रही है, ताकि वो अपना भविष्य सुरक्षित कर सके। क्युकी आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा देखने को मिल रहा है। और रोजगार की भी कमी के कारण बच्चे बहुत अधिक दवाब में हैं।

2- खान पान में बदलाव-

 एक मुख्य कारण खान पान में आया बदलाव है, आजकल युवा वर्ग जंक फूड खाना पसंद करती है, और आजकल हर चीज में मिलावट देखने को मिलती है, जिसके कारण हमारे शरीर बहुत सारे रसायन कि मात्रा बढ़ जाती है, जिसकी हमें बहुत कम आवश्यकता होती है, उसका स्तर जंक फूड इत्यादि में बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता हैं। जो कि एक मुख्य कारण हैं।

3- फिजिकल एक्टिविटी का कम होना।

आजकल युवा वर्ग सोशल मीडिया में अत्यधिक समय गुजारता हैं। और उनकी फिजिकल एक्टिविटी बहुत कम हो गई है, जिस वजह उनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो गया है। जिस कारण उनकी सहनशीलता का अभाव हो गया है।

मानसिक रोग को दूर करने के उपाय।

1- डॉक्टर के द्वारा परामर्श- अगर कोई व्यक्ति इस रोग से पीड़ित है, तो ऐसे व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह से काउंसलिंग अथवा मेडिसिन का नियमित पालन करना चाहिए,
      असल में नियमित मेडिसिन लेने से रोगी के मस्तिष्क में जिस भी रसायन का स्तर कम या ज्यादा होता है, उसको संतुलित किया जाता है। जिससे रोगी के मस्तिष्क में आने वाले नेगेटिव विचारों को कंट्रोल करता है जिससे रोगी को दैनिक दिनचर्या में कार्य करने में सहूलियत मिलती है और उसका काम के प्रति उत्साह उसको देखने का नजरिया बदल जाता है।

एक्सरसाइज के द्वारा।

प्रतिदिन एक्सरसाइज करने से, हमारे शरीर में रक्त का संचरण अच्छी तरह होता है। जिसके कारण पसीने के रूप में हमारे शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं, जिसके कारण हमारे ध्यान और एकाग्रता में वृद्धि होती है, और हमारा शरीर बीमारियों से दूर रहता है।

योग और ध्यान के द्वारा-

नियमित योगा करने से हमारे मस्तिष्क में ऑक्सीजन का संचरण अच्छी तरह होता है, और साथ ही हमारे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। नियमित योगा करने से हमारे शरीर के छोटे-छोटे अंगों में लचीलापन आता है जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है, साथ ही हमारे मन को शांत रखता है।
    ध्यान या मेडिटेशन करने से हमारा फोकस और एकाग्रता में वृद्धि होती है साथी मेडिटेशन करने से अनबैलेंस हारमोंस को पुनः बैलेंस करता है साथ ही हमारे मस्तिष्क में आने वाले विचारों को नियंत्रित करता है।

खानपान के द्वारा-

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान में बहुत ज्यादा बदलाव आया है लोग ज्यादातर जंग फूड, बाहर का खाना ज्यादा खाना पसंद करते हैं। और आजकल हर चीज में मिलावट देखने को मिलती है जिसके कारण हमारे शरीर को कुछ रसायनों की मात्रा अधिक मिल जाती है, जिसके हमारे शरीर को आवश्यकता भी नहीं होती है।
    इसलिए आवश्यक है हम अपने खाने पर ध्यान दें ज्यादा बाहर का ना खाएं, साथ ही खाने के साथ फ्रूट ड्रा,फ्रूट, दूध का सेवन अवश्य करें। और घर का ही खाना खाए।

दिनचर्या में बदलाव के द्वारा-

आजकल हमारे लाइफस्टाइल में बहुत चेंज हो गया है। तो सबसे पहले हमारी प्रतिदिन की दिनचर्या मैं सुधार करना चाहिए, हमें टाइम पर सुना, टाइम से उठना, टाइम पर खाना खाना यह बहुत महत्वपूर्ण है। यह चीजें देखने में छोटी लगती हैं लेकिन हमारे जीवन जीने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है

निष्कर्ष-

हमारे देश में, मानसिक रोग तेजी से बढ़ता जा रहा है इसके कई कारण है जो मैंने आपको ऊपर बताए हैं। हमें चाहिए कि हमें इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के साथ सामान्य व्यवहार करना चाहिए। साथ ही हमें अपने नजरियों को बदलना चाहिए। क्योंकि यह बीमारी भी अन्य बीमारियों की तरह है। एक सर्वे के अनुसार हमारे देश में 50% बीमारी से पीड़ित व्यक्ति ही डॉक्टर के पास इलाज करवाता है। बाकी व्यक्ति इसका इलाज नहीं करवाते हैं। इसके कई कारण है जैसे समाज में उनको अलग नजरिए से देखा जाता है, उनके साथ भेदभाव किया जाता है। इसी कारण यह रोग तेजी से बढ़ता जा रहा है।
         इस रोग से बचने के लिए हमें डॉक्टरी सलाह, एक्सरसाइज, मेडिटेशन, अपने खान-पान में बदलाव करना बहुत आवश्यक है।
        यह रोग आजकल युवा वर्ग में ज्यादा देखने को मिलता है, उनके ऊपर स्टडी का दबाव, भविष्य को लेकर दबाव, अपने आपको टाइम ना देता ना, ऐसे कई कारण है जिसकी वजह से यह रोग युवा वर्ग में ज्यादा देखने को मिल रहा है। इसलिए हमें अपने आसपास लोगों को इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।
       


टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां