कोरोना से सीख।



कोरोना-
कोरोना महामारी जो कि आज पूरा विश्व इस बीमारी से जूझ रहा है। इससे पूरे विश्व की आर्थिक व्यवस्था, लाइफ स्टाइल, जिंदगी का नया पहलू , बहुत सारी चीजे जो बदल चुकी है। कोरोना ने जीवन के प्रति हमारा नजरिया ही बदल डाला जो कि हम भूलते जा रहे थे। ओर यही पर प्रकृति अपना काम करती है, जब भी धरती पर अनावश्यक गति विधि होती है तो प्रकृति हमें वापस से उसी जगह खड़ा कर देती है। जो कि हमारे हित में हो।

अब बात आती है कि कोरोना से हमें क्या शीख मिली है।

कम पैसों में भी घर चल सकता है।
आज कल की तेज रफ्तार वाली जिंदगी में जहां हमें केवल पैसे कमाने है, चाहे उसका हम ठीक से उपयोग भी ना कर पाए। लेकिन कोरोना माहमारी के बाद जो लॉक डाउन हुआ, उसमे कई लोगो की जॉब चली गई, बहुतो को तो सैलरी मिलनी बंद हो गई जो की दुख की बात है, लेकिन इससे लोग ये समज गए कि घर कम पैंसो में भी चल सकता है। लोगो का फालतू का खर्चा कम हो गया, जैसे बाहर जाना, पार्टी, बाहर का खाना बंद हो गया ऐंशी बहुत सारी बाते है।
एक दूसरा पहलू ये भी है कि इसमें मजदूर वर्ग और मिडिल क्लास वाले लोगो को तकलीफ़ सहन करनी पड़ी, पर इससे उनको भी बहुत कुछ सीखने को मिला।

परिवार को समय देना।
हम लोगो की जिंदगी इतनी तेज हो गई थी कि हमने कभी परिवार को समय ही नहीं दिया। परिवार का दुख दर्द का, छोटी छोटी बातों को हम कभी समझ ही नहीं पाए। बच्चो की चोटी चोटी खुशी कभी महशुश ही नहीं की। लेकिन कोरॉना बीमारी की वजह से जो लॉक डाउन हुआ, उससे हमें ये सब बातें समज में आ गई जो हम भूल चुके थे।

प्रकृति का नियम कभी नहीं बदलता।
हम कितनी भी तेज रफ्तार से दौड़ के या कितनी भी आगे बढ़ जाहे लेकिन प्रकृति अपना नियम नहीं तोड़ती वो हमें अपना असली वजूद बता देती है। प्रकृति हमेशा संतुलन बनाए रखती है। ओर हर दिन हमें सिखाती रहती हैं, बस हम समझ नी पाते। जब भी धरती पर अनावश्यक गति विधि होती हैं तो प्रकृति उसको संतुलन कर देती है।

अपने प्रति जागरूक किया।
लॉक डाउन होने के बाद लोगो ने अपने आप को समय दिया ओर अपनी फिटनेस पर ध्यान दिया, कोई योगा तो कोई एक्सरसाइज करने लगा जिससे लोगो को इसका असली मकसद पता लगा। इसके साथ साथ लोगो ने सोशियल कार्य भी किया को कि बहुत ही अच्छी बात है। इससे हमें एकजुट होने का संदेश भी मिला।

 गांव में वापसी।
एक समय ऐसा था कि सारे लोग शहर की ओर चले गए थे।  जिससे बहुत सारे गांव खाली हो गए थे लेकिन अब बहुत सारे लोग घर वापस आ गए। और अपने लिए रोजगार के साधन अपने ही गांव में ही जुठा रहे है, बहुत सारे लोग अपना बिजनेस कर रहे है जिससे बहुत सारे लोगो को रोजगार मिल रहा है। और एक बार फिर वो अपने परिवार अपने लोगो के बीच है। और लोगो को अब समझ में आ रहा है कि खुली हवा में जीना क्या होता है, जहां कोई पोलूशन नहीं, कि शोर शराबा नहीं है।


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