स्कूल कॉलेज अभिभावक और अध्यापक की समस्या और समाधान !


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                           आजकल स्कूल और कॉलेजों में, अभिभावक तथा अध्यापक कई सारे समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कभी अभिभावक की बात अध्यापक समझने को तैयार नहीं है और कहीं अध्यापक की बात अभिभावक समझने को तैयार नहीं है आखिर यह कम्युनिकेशन अंतर क्यों है। अगर मैं यूं कहूं, काफी हद तक सरकार इसकी जिम्मेदार है। क्योंकि गवर्नमेंट ने जो नए नियम बनाए हैं उनकी वजह से अध्यापक तथा अभिभावक दोनों ही इस समस्या से परेशान हैं चलो इसको समझने की कोशिश करते हैं।
अभिभावक की समस्या।

1/ आजकल देखने को मिल रहा है, बहुत सारे स्कूल बच्चों को जो घर के लिए होमवर्क दिया जाता है वह बच्चे की उम्र के हिसाब से काफी कठिन होता है और वह होमवर्क अधिकतर पेरेंट्स को ही पूरा करना पड़ता है तो यहां पर सवाल उठता है कि टीचर्स को भी पता होता है कि यह जो होमवर्क दिया गया है अधिकतर वह अभिभावक के द्वारा ही किया जाता है तो इस तरीके का होमवर्क  दे के फायदा बल्कि  नुकसान यह होता है इसमें अभिभावक की जिम्मेदारियां ज्यादा बढ़ जाती है और आजकल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में समय निकालना बहुत मुश्किल होता है।
2/ आजकल स्कूलों में बढ़ती फीस  को लेकर भी कई समस्याएं है एक मिडिल क्लास फैमिली अपने बच्चे को एक अच्छी शिक्षा नहीं दे पाता। इसके साथ साथ कई सारे स्कूलों में अदर एक्टिविटीज के लिए फीस ली जाती है जिसमें कई सारी एक्टिविटीज सारे बच्चों के लिए फायदेमंद नहीं होती है लेकिन फीस सबकी ही देनी पड़ती है। इससे नुकसान यह होता है कि बच्चों के ऊपर भी दबाव पड़ता है और अभिभावक के ऊपर भी।
3/ अगर आपका बच्चा किसी नामी स्कूल में पढ़ाई करता है तो उसके अभिभावकों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है क्योंकि अच्छे स्कूल होने के नाम से वहां पर अभिभावक की समस्याएं नहीं सुनी जाती है क्योंकि अगर स्कूल में पढ़ाई अच्छी है तो स्वाभविक है, बच्चे भी ज्यादा होंगे और इससे होता है यह है कुछ बच्चों के निकल जाने से  इनको कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। और अभिभावक की मजबूरी यह है कि वह अपने बच्चे को एक अच्छी शिक्षा देना चाहता है।
4/ कई स्कूलों में तो अभिभावकों को स्कूल यूनिफार्म बुक्स आदि इस तरीके की चीजें स्कूल से ही खरीदनी पड़ती है क्योंकि यह स्कूल का नियम होता है और इसमें अभिभावकों कीमत से अधिक पैसे चुकाने पड़ते हैं। या फिर कुछ दुकानें होती है जिनसे स्कूल अभिभावकों को कुछ दुकानों से ही खरीदने की राय देते हैं और वह दुकानदार कीमत से अधिक दामों पर यह सारी चीजें बेचता है।
अध्यापकों की समस्या।
कुछ सालों से अध्यापक बहुत सारी समस्याओं से परेशान है।
1/ कुछ सालों से नए नियमों के अनुसार बच्चों की बेहतरी के लिए कुछ नियम बनाए गए जैसे कि कोई भी अध्यापक किसी भी बच्चे पर हाथ भी नहीं उठा सकता, बच्चों को फेल नहीं कर सकता।
        चलो माना यह सब नियम सही है लेकिन आजकल के बच्चे सोशल मीडिया में इतने ज्यादा एक्टिव हैं कि उनको सारे रूल्स एंड रेगुलेशन पता होते हैं जिसका वह दुरुपयोग करते हैं क्योंकि उनको पता है टीचर्स उनके ऊपर हाथ नहीं उठा सकता, फेल नहीं कर सकता आदि। अगर कभी किसी टीचर्स ने किसी बच्चे पर किसी सही बात के लिए भी हाथ उठा दिया तो वह बच्चा अपने अभिभावक के पास बताएगा और हम सबको जैसे कि पता है अपने बच्चे सबको ही प्यारे होते हैं। और हम केवल एक ही पहलू देखते हैं जिसका नतीजा क्या होता है उसका खामियाजाना अध्यापक को भोगना पड़ता है। ऐसी स्थिति में अध्यापक को काफी सारी बातों का ध्यान रखना पड़ता है कि बच्चों को पनिशमेंट भी नहीं देना है और उसका रिजल्ट भी अच्छा होना चाहिए और इस वजह से अध्यापकों को काफी कष्ट झेलना पड़ता है।
2/ कई बार देखने को मिला है कि अभिभावक अध्यापकों को बेवजह एक पहलू देखकर निर्णय लेता है अध्यापकों को शिकायत करता है लेकिन अभिभावकों को समझना चाहिए क्या अध्यापक जोकि 5 से 6 घंटे लगातार खड़े रहकर बच्चों को पढ़ाता है उसके बावजूद भी अभिभावक केवल एक ही पहलू देखें तो यह सही नहीं है।
अभिभावक को खुद उनकी जगह पर अपने आप को रख कर देखना चाहिए। क्या आप अपने काम के प्रति लापरवाही करते हो शायद बिल्कुल भी नहीं आप अपनी क्षमता के हिसाब से अपनी जी जान लगा देते हो, उसी प्रकार एक अध्यापक अपनी जी और जान से मेहनत करता है। लेकिन फिर भी कुछ अभिभावक शिकायत करते रहते हैं।

मैं आपको एक उदाहरण के तौर पर समझाने की कोशिश करता हूं।
अगर किसी अभिभावक के दो बच्चे हैं। और आपका पूरा अधिकार है आप उन को पीट सकते हैं पनिशमेंट दे सकते हैं। लेकिन इसके बावजूद भी आप हो या मैं हूं हम अपने बच्चों को संभाल नहीं पाते हैं बच्चों के स्कूल आने के बाद कुछ ही घंटे बच्चा हमारे साथ रहते हैं और हम परेशान हो जाते हैं जबकि हमारा पूरा अधिकार है कि मुझे बच्चों को पनिशमेंट दे सकते हैं लेकिन इसके बावजूद भी हम बच्चों को संभाल नहीं पाते हैं।
         तो जिस स्कूल में हजारों बच्चे हो और कुछ ही अध्यापक है और उस स्थिति में बच्चों को संभालना बच्चों को पढ़ाना(और वह भी बिना पनिशमेंट के) तो अपने आप में बहुत बड़ी बात है।

समाधान

पहले तो समझने वाली बात यह है अभिभावक हो या अध्यापक है दोनों इंसान। और गलती इंसान से ही होती है। बस फर्क इतना है आप उस गलती को किस तरीके से सुधार सकते हो या कम कर सकते हो।
       अध्यापकों को अभिभावकों की बात सुननी चाहिए चाहे वह छोटी से छोटी क्यों ना हो क्योंकि शायद सुनने में में छोटी लगे पर वह बात किसी अभिभावकों के लिए बहुत बड़ी हो सकती है।
      और अभिभावकों को समझने की जरूरत है कि अध्यापक जिसके पास कई बच्चे हो और हर किसी को सुनना और उस पर एक्शन लेना बहुत बड़ी बात है। तो अगर अध्यापक किसी बच्चे की भलाई के लिए अभिभावक से शिकायत करता है तो अभिभावक को दोनों पहलू बच्चे का भी और अध्यापक का भी समझना बहुत जरूरी है और वह तभी संभव है जब अभिभावक लगातार अध्यापक के संपर्क में रहे।
     अभिभावक और अध्यापक जितना संपर्क में रहेंगे उतना ही को एक दूसरे को समझ पाएंगे जिससे बच्चों का भला हो सके। और आजकल तो सोशल मीडिया का दौर है तो टीचर्स और अभिभावकों को एक ग्रुप बना लेना चाहिए जैसे व्हाट्सएप ग्रुप आदि। और उस ग्रुप में कम से कम 2 या 3 दिन में अभिभावक हो या अध्यापक हो जिसको जो भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है चाहे बच्चों की तरफ से हो अध्यापक की तरफ से वह आपस में बात करके समझाया जा सकता है।
      इसमें मैंने ऊपर कहा था कि इसमें सरकार की लापरवाही नजर आती है क्योंकि जब भी किसी के लिए भी कोई रूल्स और रेगुलेशन बनाए जाते हैं तो कहीं ना कहीं उनमें लचीलापन रह जाता है (जैसे कोई नियम किसी भी कार्य के लिए बनाया जाता है वहां तक तो ठीक है लेकिन उसका कहीं ना कहीं दुरुपयोग होने के ज्यादा आशंका रहती है तो सरकार को चाहिए कि जब भी कोई रूल्स और रेगुलेशन बनाई जाए तो उन पर मनन किया जाए ताकि कोई इसका गलत इस्तेमाल भी करें तो उसके लिए भी सजा होनी जरूरी है। यह बात मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि जब कोई कानून बन जाता है तो फिर उसको हटाना मुश्किल होता है इसलिए जब भी कोई नया कानून बनाया जाए तो उसमें गहराई से मनोर होना चाहिए उसका दुरुपयोग और सदुपयोग को ध्यान में रखकर ही कानून बनाया जाए)
   
      एक बात जो हमेशा याद रखनी चाहिए अगर हम नेगेटिव चीजों की और आकर्षित होंगे तो हमें नेगेटिव चीजें हैं दिखाई देंगी और अगर हम किसी चीज को पॉजिटिव तरीके से देखें और उनका हल निकालने की कोशिश करें तो हमें सफलता अवश्य मिलेगी।

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