समाज में बढ़ता भ्रष्टाचार।


भ्रष्टाचार क्या है यह हम सब को अच्छी तरह जानते है। और यह क्यों बढ़ता जा रहा है यह हम सब को भी पता है। लेकिन कुछ ही लोग हैं जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं, आजकल सबको पता है भ्रष्टाचार कहां से शुरू होता है और कहां खत्म होता है। लेकिन बात यह है, यह क्यों इतना बढ़ता जा रहा है इसको विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।

भ्रष्टाचार क्यों बढ़ता जा रहा है?

भ्रष्टाचार बढ़ने के अनेक कारण है। सबसे पहले कोई भी अपनी आने वाली पीढ़ी के बारे में नहीं सोच रहा है वह केवल अपने लिए जी रहा है आजकल हर सरकारी विभाग हो या कोई प्राइवेट सेक्टर में हर जगह भ्रष्टाचार देखने को मिल रहा है।
अगर हम सोचे कि भ्रष्टाचार इतना क्यों बढ़ता जा रहा है तो हमें थोड़ा सोचने की जरूरत है। प्रत्येक सरकार का कार्यकाल 5 साल का होता है अब 5 साल में वह क्या क्या करें यह समझने वाली बात है कि जब भी कोई सरकार आती है जैसे उसकी सरकार बनती है तो 1 साल तो उसको अपने कार्य के प्रति अपने क्षेत्र के प्रति काम को समझने में लग जाता है बाकी रहे 4 साल उसमें कई सारे अधूरे काम है जोकि पिछली सरकार द्वारा पूरे नहीं किए जा सके उनको समझने में लग जाते हैं और वह उनको पूरा भी नहीं करना चाहती क्योंकि अगर नई सरकार वह काम पूरा करती है तो श्रेया पिछली वाली सरकार को जाता है यह हमारे देश का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण सोच है। अब रहे बाकी की कुछ साल उसमें सरकार को आने वाले चुनाव की तैयारी करने में लग जाती है तो वह काम करे तो कब करें ऐसे में भ्रष्टाचार ही होगा। आजकल हर राजनीतिक पार्टी केवल अपने कार्यकाल को पूरा करने के लिए जो भी हो सके वह कार्य करती है चाहे वह भ्रष्ट ही क्यों ना हो, क्यों(कुछ नेताओं को छोड़कर, अभी भी हमारे देश में बहुत सारे ऐसे नेता हैं जो केवल देश हित के लिए कार्य कर रहे हैं) उन राजनीतिक पार्टियों का देश से या आने वाली पीढ़ी से कोई मतलब ही नहीं है वह केवल अपने लिए जी रहे हैं। आजकल हर जगह भ्रष्टाचार ही नजर आता है चाहे वह शिक्षा के क्षेत्र में हो नौकरी के क्षेत्र में हो या अन्य किसी क्षेत्र में हो हर जगह भ्रष्टाचार है।

बेरोजगारी के कारण भ्रष्टाचार बढ़ता ही जा रहा है।

आजकल हमारे देश में बेरोजगारी बहुत ही ज्यादा है जिसके कारण कोई भी व्यक्ति एक नौकरी के लिए उच्च अधिकारियों को रिश्वत देता है तो बेरोजगारी भी एक भ्रष्टाचार बढ़ने का एक मुख्य पहलू है। अब आप सोचिए जो व्यक्ति नौकरी के लिए रिश्वत देता है तो क्या वह रिश्वत लेगा बिल्कुल लेगा क्योंकि यह एक चैन बनी हुई है जिसे तोड़ना बहुत मुश्किल है और यह चेन तब ही टूट सकती है जब कोई रिश्वत देगा नहीं और कोई लेगा नहीं लेकिन ऐसी संभावना कम ही नजर आ रही है क्योंकि हमारे देश में बेरोजगारी बहुत ही ज्यादा है। जिसके अनेक कारण है, जैसे शिक्षा में बदलाव आए है क्योंकि अब सरकार की योजना के अनुसार बहुत ही कम बच्चों को फेल किया जाता है और वह आसानी से अपनी पढ़ाई पूरी कर लेते हैं लेकिन क्या वह इसी नौकरी या किसी उच्च पद के लिए सक्षम है यह बहुत बड़ा सवाल है क्योंकि ऐसे ही व्यक्ति रिश्वत आदि में लिप्त रहते हैं क्योंकि अच्छी शिक्षा ना होने के कारण उन्हें सही गलत और हमारी आने वाली पीढ़ी के बारे में उनका कोई नजरिया रहता ही नहीं है।

सरकार की दोष पूर्ण नीति।

जब भी कोई सरकार नौकरी के लिए कोई विज्ञप्ति निकालती है तो उसमें लाखों आवेदक आवेदन करते हैं और उसके लिए उन्हें फीस भी भरनी पड़ती है जबकि रिक्त पद कुछ ही होते हैं तो इसमें सोचने वाली बात यह है कि जब हजारों लाखों में आवेदकों द्वारा आवेदक यह जाता है तो सरकार के पास एक बहुत मात्रा में फीस द्वारा रुपए एकत्रित के जाते हैं अगर हम एक गणना करें तो जितने भी आवेदकों द्वारा फीस एक एकत्रित की जाती है और जितने पद रिक्त हैं वह रिक्त पद पर यदि आवेदकों को पद दिया जाता है तो 20 या 30 साल तक जॉब करने के बावजूद भी जो धन सरकार द्वारा फीस के रूप में एकत्रित किया गया था वह भी पूरा खर्च नहीं हो पाता है। बल्कि सरकार का यह कहना होता है कि हमने इतने युवाओं को नौकरी दी है लेकिन अगर सही पहलू देखा जाए तो जिन युवाओं को नौकरी दे दी जाती है और उसके फल स्वरुप उनको जो सैलरी दी जाती है वह आवेदकों द्वारा फीस के रूप में एकत्रित किया गया धन होता है, जोकि युवाओं के नौकरी पूरी होने पर भी वह धन खर्च नहीं हो पाता। और बाकी जो युवा हैं जिनको नौकरी नहीं मिल पाती है तो वह किसी न किसी रूप में अपनी दिनचर्या चलाने के लिए भ्रष्ट होता ही जाता है।

क्या सरकार को इसके बारे में जानती है?

जैसे कि हमारे समाज में कई लोग गलत होते हैं और कई सही होते हैं उसी तरह हर सरकार में भी कुछ लोग सही होते हैं और कुछ गलत।
       लेकिन आज के दौर में ज्यादातर लोग भ्रष्ट हो गए हैं अगर कोई भी सरकार हो और उस सरकार में 50% अच्छे इन्सान भी हो लेकिन जो 50% गलत इंसान है वह अच्छे इंसानों में भारी पड़ जाते हैं क्योंकि भ्रष्टाचार ने अभी एक विस्तृत रूप ले लिया है अगर कोई नेता या कोई सरकारी कर्मचारी अच्छा काम करना भी चाहे और वह कोई कदम भी उठाना चाहे अच्छे कार्यों के लिए पर वह चाह कर भी यह नहीं कर सकता क्योंकि भ्रष्टाचार इतना बढ़ चुका है अगर वह ऐसा कदम उठाता है तो शायद उसे अपना पद ही छोड़ना पड़े।
     सरकार को चाहिए कि किसी भी पद पर आसीन व्यक्ति चाहे वह कोई नेता हो या किसी पद पर आसीन नौकरी करने वाला व्यक्ति हो उसे अपने कार्य के प्रति सजग और इमानदार रहकर ही कार्य करना चाहिए। नहीं तो एक समय ऐसा आएगा कि जब हम चाह कर भी भ्रष्टाचार को नहीं रोक पाएंगे। और इसमें हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाए और सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करें और खुद भी इमानदारी से और सजक होकर अपने देश की प्रगति के लिए कार्य करें। क्योंकि भ्रष्टाचार से गरीबी, बेरोजगारी, अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं जोकि देश की प्रगति में एक बहुत बड़ा अवरोधक है।
      भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में जितना सरकार का योगदान है (कुछ नेताओं को छोड़कर।जो इस कार्य को बढ़ावा दे रहे हैं) उतना ही योगदान हमारा भी है, तो सरकार और समाज दोनों को साथ में मिलकर कार्य करके भ्रष्टाचार को रोक सकते हैं।
     

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां