संयुक्त परिवार में बच्चों का विकास उचित प्रकार से होता है?


आजकल संयुक्त परिवार कम ही देखने को मिलते हैं। क्योंकि आजकल हर कोई अपने परिवार के साथ अलग जीना चाहता है इसे कई कारण है जैसे वह अपने तरीके से जियो किसी की रोक टोंक ना हो और वह अपने परिवार का अच्छे से ख्याल रख सके यह सोचकर ही आजकल बहुत कम संयुक्त परिवार देखने को मिलते हैं।
    अब इसमें प्रश्न ये उठता है किसी परिवार में बच्चों का विकास उचित प्रकार से होता है? इसके भी कई पहलू है जो मैं आपके साथ व्यक्त करना चाहता हूं। पहले हम यह जानने का प्रयास करते हैं की संयुक्त परिवार होता क्या है और वह कैसा होना चाहिए तभी जाकिर बच्चों की परवरिश अच्छी हो पाएगी।

संयुक्त परिवार क्या है?
जब किसी मां-बाप के सभी बच्चे एक ही घर में रहकर दुख, सुख, खाना या एक दूसरे का समान पोषण करना, सबका एक नजरिया होना (परिवार हित के लिए) और किसी भी प्रकार का किसी भी बच्चे के साथ भेद भाव ना होना। जिससे परिवार खुश रहे और अपने आने वाली पीढ़ी को भी सही नसीहत दे वह संयुक्त परिवार कहलाता है।


संयुक्त परिवार में बच्चों का विकास उचित प्रकार से होता है?
भले ही लोग अपने परिवार के साथ अलग-अलग अपनी मर्जी से आगे बढ़ रहे हैं लेकिन क्या उसमें बच्चों का विकास हो पाता है या उनकी उचित देखभाल या उनके सोचने का तरीका किस तरीके का होता है वह बदल पाता है। बिल्कुल ही, संयुक्त परिवार और परिवार में काफी फर्क है।
      संयुक्त परिवार में बहुत सारे लोग होने के कारण और हर उम्र के व्यक्ति होने के कारण कई बातें सामने आती हैं। और उनका हल भी निकलता है। तो जब कोई बच्चा संयुक्त परिवार में रहता है, तो उसको यही सारी बातें जानने को मिलती है। जैसे.......।
                                                                                                                    बच्चों का सामाजिक होना।
आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में बच्चों को सामाजिक होना भी बहुत जरूरी है और यह सारी बातें एक साथ संयुक्त परिवार में रहकर जानने को मिलती है।
   जैसे कि मैंने ऊपर भी बताया है, कि संयुक्त परिवार में हर उम्र के व्यक्ति होते हैं छोटे से लेकर वृद्ध उम्र तक के, और इसमें होता यह है कि कि बच्चा जब ऐसे माहौल में रहता है तो उसको सबकी बातें सुनने को मिलती है और साथ में भी उसका समाधान भी मिलता है बड़ों की बात सुनकर और उन पर अमल करके बच्चा आत्मनिर्भर बनता है। और साथ में ही बच्चे को खेलने कूदने के लिए भी एक अच्छा माहौल मिलता है।
संयुक्त परिवार होने के कारण लोगों का मिलना जुलना काफी हो जाता है तो बच्चों को यह सीख मिलती है कि किस तरीके से किसके साथ कैसे बर्ताव करना है। जिससे बच्चा सामाजिक होता है जोकि उसके भविष्य के लिए और आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत अहम है। और वह हर किसी से कुछ ना कुछ सीखता रहता है। इससे बच्चों की पढ़ाई में भी काफी मदद मिलती है क्योंकि संयुक्त परिवार होने से हर किसी का क्षेत्र अलग होता है। और उनको एक अच्छी दिशा मिल जाती है। क्योंकि हर कोई अपने क्षेत्र, अपने अनुभव से बच्चों को दिशा निर्देश करते रहते हैं जोकि काफी फायदेमंद होता है।

बच्चों की पढ़ाई में ध्यान देना।
अगर संयुक्त परिवार है तो बच्चों की पढ़ाई मैं भी अच्छा ध्यान दिया जाता है क्योंकि घर का कोई न कोई सदस्य संयुक्त परिवार होने से कुछ समय के लिए उनके पास समय होता है तो वह बच्चों पर ध्यान दे सकते हैं और अपने अनुभव और क्षेत्र के हिसाब से बच्चों को निर्देशित भी करता है। और इससे बच्चे के अंदर एक अपनेपन की भावना भी विकसित होती है जो कि बहुत जरूरी है।
    जैसे कि आजकल सोशल मीडिया का इस्तेमाल बच्चे बहुत ज्यादा करता है और इस उम्र में स्वाभाविक है कि बच्चों को यह पता नहीं होता क्या देखना उनके लिए जरूरी है और क्या नहीं। तो ऐसे में घर का कोई ना कोई भी सदस्य ऐसी गतिविधियों पर नजर रख सकता है और उनको समझा सकता है उनके लिए क्या सही है और क्या गलत।

भविष्य के लिए निर्देशित करना।
जब संयुक्त परिवार होता है तो उस परिवार में कोई डॉक्टर होता है, इंजीनियर होता है, कोई बिजनेसमैन होता है आदि। तो ऐसे में बच्चों का भविष्य की योजना क्या होनी चाहिए यह सारे लोग और साथ में है बच्चे की राय लेकर या उसकी गतिविधियां देख कर यह पता लगाया जा सकता है, कि बच्चे का मन किस और अगर्शित है जिससे बच्चों की भविष्य की योजना बनाई जा सके ताकि वह अपने क्षेत्र में अच्छा काम कर सके।

किसी भी समस्या का समाधान निकाल सकते हैं।
जैसे कि हम सबको पता है बच्चों के अंदर बहुत सारी एनर्जी होती है और वह छोटी सी छोटी बात को भी आराम से पकड़ लेते हैं तो जब बच्चा है संयुक्त परिवार में रहता है तो वो ऐसी बहुत सारी गतिविधियों को देखता है और साथ में है बड़ों को देखकर उसका समाधान कैसे निकाला जाए यह सब बातें सीख लेता है जिससे वह आत्मनिर्भर और सही निर्णय लेने में सक्षम बन जाता है।

संयुक्त परिवार में बच्चों की एनर्जी का सही इस्तेमाल।
हर किसी के बच्चे के पास बड़ों से ज्यादा एनर्जी होती है अगर उसे सही दिशा में निर्देशित नहीं किया जाए तो वह उस एनर्जी पर किसी गलत काम में इस्तेमाल कर सकता है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी घोड़े को बेकाबू छोड़ा जाए बिना उसकी मंजिल के तो वह दौड़ता ही चला जाएगा तो ऐसे में एनर्जी तो पूरी लग रही है लेकिन मंजिल तक नहीं पहुंच पाता। यही बात बच्चों पर लागू होती है अगर उनकी एनर्जी पर सही इस्तेमाल सही दिशा नहीं दी जाए तो वह गलत रास्ते में जा सकते हैं। और संयुक्त परिवार से यही फायदा है की घर में ज्यादा सदस्य होने के कारण बच्चों पर अच्छी निगरानी रखी जा सकती है।

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संयुक्त परिवार बच्चों को मजबूत बनाता है।
आजकल का दौर सोशल मीडिया का है जिसका बच्चा पूरा इस्तेमाल करता है चाहे वह गलत तरीके से हो या सही तरीके से। लेकिन इसकी वजह से बच्चों की शारीरिक तौर पर विकास अच्छे से नहीं होता क्योंकि वह खाली समय में सोशल मीडिया ,टेलीविजन आदि में व्यस्त रहते हैं जिसके कारण उनका खेलकूद, व्यायाम धीरे धीरे कम होता जाता है और आपको पता ही है अगर शरीर स्वस्थ है तो मन भी स्वस्थ होगा। और यहीं पर काम करता है संयुक्त परिवार के सदस्य वह अपने अनुभव से बच्चों को व्यायाम योगा आदि सिखा सकते हैं। ताकि वह शारीरिक और मानसिक तौर पर मजबूत बने।

संयुक्त परिवार के कठिनाइयां।
संयुक्त परिवार हो या केवल परिवार आखिरकार है तो इंसान तो संयुक्त परिवार में ज्यादा सदस्य होने से मनमुटाव होने के ज्यादा आशंका रहती है। क्योंकि आजकल की जो नई पीढ़ी है उसका जीने का नजरिया बिल्कुल अलग है और संयुक्त परिवार में हर उम्र के व्यक्ति होते हैं जिसमें तालमेल बिठाना मुश्किल होता है, जिसके कारण मनमुटाव होने के ज्यादा आशंका रहती है। आप सब एक कहावत तो सुनी होगी जिस घर में बर्तन होंगे तो आवाज आएगी ही।
       संयुक्त परिवार में एक बात और देखने को मिलती है की जो बूढ़े व्यक्ति होते हैं वह अपने तरीके से घर चलाना चाहते हैं और जो नई पीढ़ी है वह अपने तरीके से क्योंकि स्वाभाविक है नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी में जीने का तरीका रहन-सहन का तरीका अलग तरीके से होता है। और नई पीढ़ी में सोशल मीडिया, मॉल.....। कपड़े पहनने का तरीका कुछ अलग ही है जिसके कारण भी संयुक्त परिवार में यह सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। और आये दिन झगड़े होते रहते हैं। क्योंकि सबको अपने तरीके से जीना होता है और यह शहीद परिवार में होना बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य होता है।

निष्कर्ष।
अंततः अगर हम देखें पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी। दोनों को ही समझौता करना पड़ेगा क्योंकि ताली एक ही हाथ से नहीं बजती। पुरानी पीढ़ी को भी नई पीढ़ी की कुछ अच्छी बातें सीखनी पड़ेगी और नई पीढ़ी को भी पुरानी पीढ़ी से कुछ सीखना पड़ेगा और एक तालमेल बिठाकर एक दूसरे को समझ कर चलना पड़ेगा। क्योंकि परिवर्तन ही जीवन का नियम है। जिसस एक संयुक्त परिवार मजबूत परिवार बने और उसका फायदा सभी सदस्यों को मिले। क्योंकि बहुत सारी सीखने वाली बातें पुरानी पीढ़ी के पास भी है, और बहुत सारे सीखने वाली बातें नई पीढ़ी के पास भी है। बस जरूरत है एक दूसरे को समझने की और कुछ समझौता करने की।
 

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2 टिप्पणियां

  1. यह आज तक तुम्हारी सबसे अच्छी लेख लगी मुझे। बहुत ही संवेदनशील एवम् बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है ये। जहां आज इंसान अच्छी सेहत, अच्छा खाना, अच्छी मानसिकता की बाते कर रहा है, वहां इस विषय पे गौर करना बहुत ही अनिवार्य है। मैं १०० प्रतिशत मानता हूं की संयुक्त परिवार के फायदे बहुत ज्यादा एवम् नुकसान बहुत कम हैं। वो नुकसान समझदारी से फायदों में बदले जा सकते हैं।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी, आपके comment से मुझे बहुत प्रोत्साहन मिला। अपना कीमती समय निकाल कर आपने यह पोस्ट पढ़ी। और कमेंट लिखा उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

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