ऑनलाइन शिक्षा और स्कूली शिक्षा।


आजकल कोरोना महामारी के चलते सारी स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई जारी कर दी गई है। क्योंकि अभी इस महामारी को ध्यान में रखते हुए सरकार के पास दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है। जिससे अभिभावकों और अध्यापकों को कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
    पहले हम बात करते है ऑनलाइन शिक्षा से फायदा और नुकसान।

ऑनलाइन के फायदे-

विद्यार्थी का खुद अवलोकन करना।
जब विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई करता है, तो उसके अन्दर जो आशंका होती है, वो पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाती। जिसके कारण विद्यार्थी को स्वयं उसी विषय पर मनन करना पड़ता है।
जिससे विद्यार्थी का आत्मविश्वास बढ़ता है, और वह खुद आत्मनिर्भर बनता है। और अध्यापक द्वारा उसी विषय में, ओर विद्यार्थी भी उसी विषय में पढ़ता है तो वह दोनों बातों को ध्यान में रखकर पढ़ाई करता है। जिससे उसको उस विषय में काफी फायदा मिलता है।

दूसरे विद्यार्थियों से वार्तालाप करना।
क्योंकि जब पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है, तो उसमें कई सारी बातें बच्चे अध्यापक के साथ नहीं बता पाते। क्योंकि अध्यापक का एक साथ सब बच्चों का नजर रख पाना मुश्किल होता है। और एक तरीके से इससे बच्चों को फायदा मिलता है। जैसे वह जिस विषय पर फोकस नहीं कर पाते हैं जहां पर समझ में नहीं आता, तो वह अन्य विद्यार्थियों से वार्तालाप करके उस बात को आसानी से समझ लेता है क्योंकि एक विद्यार्थी को ही पता है कि उसने उस विषय को समझने में किन किन बातों को समझने में परेशानियां आई तो वह दूसरे विद्यार्थियों को समझाने में अपने तरीके से वार्तालाप करता है जिससे दोनों को फायदा मिलता है। एक तो जो विद्यार्थी दूसरे को समझा रहा है उसका अभ्यास हो जाता है, और दूसरे विद्यार्थी को उस विषय में समझने में परेशानियां नहीं आती।

एक दूसरे के साथ मेलजोल की भावना उत्पन्न होती है।
जब भी कोई विद्यार्थी किसी भी परेशानियों का सामना करता है, किसी विषय या टॉपिक को लेकर तो वह दूसरे विद्यार्थियों से वार्तालाप करता है। जिससे विद्यार्थियों के बीच मेलजोल बढ़ता है और सामाजिक भी हो जाता है।
    क्योंकि विद्यार्थी जब अन्य विद्यार्थियों से वार्तालाप करता है तो उसके साथ साथ दूसरे विद्यार्थियों के साथ भी उनका संपर्क बनता है। किस वजह से जब कभी भी वह वार्तालाप करते हैं किसी विषय पर तो अन्य मुद्दे भी निकलकर सामने आते हैं जिससे विद्यार्थियों को अपने विषय के साथ साथ बहुत सारी सामाजिक जानकारियां भी प्राप्त होती है।

विद्यार्थियों की नियमित दिनचर्या की आदत पड़ना।
जब से ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई है तो कोई क्लास सुबह शुरू होती है, कोई दोपहर को शुरू होती है, कोई शाम को शुरू होती है, तो इससे विद्यार्थियों का एक नित्य नियम बन जाता है जोकि काफी अच्छी बात है। वह सुबह जल्दी उठता है उसको पता होता है कि उसकी क्लास कब से कब तक है तो वह उसी तरीके से अपनी दैनिक दिनचर्या बना लेता है जो कि कुछ समय बाद उसकी एक आदत बन जाती है। उसको पता है उसको नाश्ता कब करना है, उसको लंच कब करना है, डिनर और सोना कब है जोकि एक विद्यार्थी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिससे विद्यार्थी एक शिष्टाचार विद्यार्थी बनता है।
ऑनलाइन पढ़ाई की नुकसान।

हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। उसी तरह जब एक चीज के फायदे होते हैं उसके नुकसान भी होते हैं आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप उसको अच्छे नजरिए से देखते हो या बुरे नजरिए से देखते हो।

बच्चों को पढ़ाई में परेशानियां।
क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई कोरोना महामारी की वजह से शुरू हुई है तो हर स्कूल को बिना किसी ज्यादा विचार विमर्श ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करनी पड़ी। तो स्वाभाविक बात है इसमें परेशानियां का सामना करना पड़ेगा चाय विद्यार्थी हो या अध्यापक।
ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को पुरी बातें समझ में नहीं आती है और उसके अंदर जो आशंका होती है वह उसको पूरी तरीके से अध्यापक को बता भी नहीं सकता, जिससे उसका कई  विषय अधूरा रह जाते हैं

विद्यार्थियों का लापरवाह होना।
जब भी कोई अध्यापक ऑनलाइन पढ़ाई करवाता है तो वह सारे बच्चों का ध्यान नहीं दे पाता, और यह बातें बच्चों को अच्छी तरह पता होती है, क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई में काफी सारी परेशानियां आती है जैसे इंटरनेट, एप्लीकेशन आदि, परेशानियों का सामना करना पड़ता है और बच्चे इसी का फायदा उठाते हैं। और वह पढ़ाई में लापरवाही करते हैं।

अभिभावक की जिम्मेदारियां बढ़ना।
अभिभावकों घर की जिम्मेदारी के साथ साथ बच्चों के ऊपर भी ज्यादा देख-देख करनी पड़ती है। अब इसमें अभिभावक अपनी दैनिक दिनचर्या पे ध्यान दें या बच्चों पर, और साथ में एक और समस्या है जो अभिभावक उसका सामना कर रहे हैं। जैसे कि बच्चों की फीस भरना, उसके साथ जो बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई करते हैं इंटरनेट के द्वारा उसका भी पैसा भरना जोकि इस महामारी के साथ बहुत बड़ी समस्या है।

गरीब अभिभावकों के लिए परेशानी।
अभी जो भी ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है वह अधिकतर प्राइवेट स्कूल ही करवा रहे हैं। अब प्रश्न यह उठता है जो गरीब अभिभावक हैं वह अपने बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा कहां से दें क्या वह इतने सक्षम है। और सरकारी स्कूल क्या इनमे मुमकिन है बिल्कुल भी नहीं क्योंकि अगर यह बच्चे सक्षम होते तो यह सरकारी स्कूल में नहीं किसी निजी स्कूल में पढ़ रहे होते यह एक कड़वी बात है, पर सच है। तो ऐसे बच्चे कहां से पढ़ाई शुरू करें।

स्कूली पढ़ाई।

स्कूली पढ़ाई के कई फायदे हैं जैसे-

अध्यापकों का बच्चों पर नियमित ध्यान देना।
जब बच्चे स्कूल में जाते हैं तो अध्यापक को पता होता है कौन सा बच्चा कौन से सब्जेक्ट में कमजोर है या उसकी गतिविधियां किस तरीके से है। तो इससे होता है यह है कि अध्यापक बच्चों पर व्यक्तिगत तरीके से ध्यान देता है जिससे बच्चे पढ़ाई पर ध्यान दे सकें। और अगर उनको कुछ अलग तरीके से समझाने की जरूरत भी पड़ेगी तो वह भी अध्यापक  करता है।

पढ़ाई के साथ साथ व्यवहारिक होना।
स्कूल में पढ़ाई के दौरान अलग अलग मुद्दे सामने आते हैं। जाहिर है कि उसमें अध्यापक उन मुद्दों को अपनी समझ और अनुभव के साथ बच्चों को निर्देशित करता है। जिससे बच्चों के अंदर अपनेपन की भावना (इंसानियत, मानवता आदि) उत्पन्न होती है जोकि एक इंसान के लिए बहुत जरूरी है।

बच्चों का क्रियात्मक होना।
बच्चे स्कूल में पढ़ाई के साथ साथ बहुत सारी चीजें ऐसे होती है जो व्यावहारिक तरीके से ही समझाई जाती है कई सारे मुद्दे ऐसे होते हैं जो बच्चों को प्रैक्टिकली समझाना पड़ता है जिससे बच्चों का मानसिक विकास बढ़ता है।
    और इसके साथ साथ बच्चों को शिष्टाचार, सामाजिक होना यह सारी बातें स्कूल में ही सिखाई जा सकती है।

पढ़ाई के साथ साथ खेलकूद का होना भी बहुत जरूरी।
स्कूली पढ़ाई में जहां एक तरफ बच्चों पर पढ़ाई के लिए अध्यापक मेहनत करता है उसी तरह खेलकूद में भी बच्चों पर ध्यान दिया जाता है जिससे बच्चों का मानसिक विकास के साथ-साथ शारीरिक विकास भी हो सके। शरीर स्वच्छ तो मन स्वच्छ।
      स्कूली पढ़ाई में जो खास बातें नजर आती है वह है बच्चों का एक टीम वर्क में काम करना, एक दूसरे को समझना, एक दूसरे से बहुत सारी बातें समझना और सीखना। और उसके साथ ही उनके अंदर अच्छी भावना उजागर करना जिससे बच्चे मर्यादित और अपने भविष्य में आने वाली परिस्थितियों का सामना कर सकें और अपने साथ साथ अपने परिवार अपने समाज और अपने देश के लिए कार्य करें। और यह संभव तब ही है जब बच्चे अध्यापक के निर्देशानुसार कार्य करें।

पाठ्यक्रम गतिविधियां।
स्कूल की पढ़ाई के साथ साथ बच्चों को अदर एक्टिविटीज(खेलकूद, ड्राइंग, लेखन आदि) में शामिल किया जाता है जिससे बच्चों के अंदर जो प्रतिभा रहती है वह निखर कर सामने आती है और बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है। और अध्यापक को या नजर भी आ जाता है कि कौन से बच्चे के अंदर कौनसी प्रतिभा है जिससे उन्हें उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए निर्देशित कर सकें। जिससे वह अपने आने वाले भविष्य में परेशानियों का सामना कर सके या ऐसी परिस्थितियां ना बनने दें जिससे इसका समाधान निकालने में परेशानी को, और वह एक अच्छा इंसान, बेटा, सामाजिक कार्यकर्ता आदि बन सके।

निष्कर्ष
जैसे कि मैंने ऊपर लेख में लिखा है ऑनलाइन के नुकसान। और मैंने स्कूली शिक्षा पर कोई नुकसान नहीं लिखें। और यह मैंने सोच समझकर ही लिखा है।
    क्योंकि अभी हम जिस ऑनलाइन पढ़ाई में कठिनाइयां महसूस कर रहे हैं हो सकता है आगे चलकर यही पढ़ाई का एक बड़ा मंच बन जाए। क्योंकि बढ़ती तकनीकी को देखकर यह असंभव भी नहीं है पर तकनीकी कितनी भी आगे निकल जाए बच्चों में या किसी भी इंसान में जो भावनाएं जो अच्छी भी हो सकती हैं और बुरी भी हो सकती है वह केवल इंसान ही इंसान को महसूस करा सकता है।
        इसलिए जब आप यह लेख पढ़ें तो आपको कुछ बातें अच्छी लगी है तो उनको ही अमल करें बाकी को छोड़ दें। हर इंसान का अपना नजरिया होता है जो मेरा नजरिया था वह मैंने व्यक्त किया। हो सकता है इसमें आपका नजरिया कुछ दूसरा हो क्योंकि हर इंसान अलग माहौल में, अच्छे इंसानों के साथ बुरे इंसानों के साथ जिंदगी जीता है तो उसका नजरिया उसके अनुभव के अनुसार हो सकते हैं।
     भविष्य में ऐसा भी हो सकता है की ऑनलाइन पढ़ाई और स्कूली पढ़ाई दोनों ही सामिल की जाए जिससे कि दोनों को माध्यम बनाकर बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए कार्य किया जा सके। जिससे बच्चों को और अच्छी शिक्षा मिल सके और अभिभावक या अध्यापक को ज्यादा कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

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