राजनीति का बदलता स्वरूप



आज हमारे देश में राजनीति का अलग ही पहलू देखने को मिल रहा है। अगर हम कुछ शब्दों में कहना चाहे, तो (जिसकी लाठी, उसी की भैंस) यह कहावत आज की राजनीति पर सटीक उदाहरण है। आजकल हमारे बीच में राजनीति का स्वरूप पूरा ही बदल चुका है। जिसे हम राजनीति कहते हैं अर्थात राज करने की नीति यह अब सही में राज करने की ही नीति रह गई है। लेकिन यह नीति देश की जनता पर राज करने की है, वह चाहे सही हो या गलत आजकल तो सब जगह गलत ही गलत है देखने को मिल रहा है, जिसकी जहां सरकार है, वह अपने ही नियम कानून बना रहा है जब चाहे कभी भी नया नियम बन जाए और कभी भी खत्म हो जाए। पर जो नियम कानून बनते हो या खत्म किए जा रहे हैं वह केवल अपनी भलाई के लिए राजनीतिक पार्टियां कर रही है। आखिर ऐसा क्यों हमारे ही देश में होता आ रहा है। इसके कई कारण है।    

 अपनी भलाई के लिए राजनीति करना  ।                                                                                                                     अब राजनीति का स्वरूप इतना बदल चुका है, की अधिकांश पार्टियां अपनी भलाई के लिए राजनीति कर रहे हैं। उनको देश के विकास से कोई मतलब नहीं। उनके बस 5 साल राजनीति के अच्छे निकल जाए, और साथ में अपनी नई पीढ़ी का सही से इंतजाम हो जाए, बस उनके लिए वही काफी है। उनको देश से कोई मतलब नहीं। कई राजनेता तो राजनीति में इतने अंधे हो चुके हैं, कि वे अपने ही परिवार के साथ राजनीति करते हैं, तो फिर आम आदमी का क्या वह तो उनके लिए केवल एक वोट बैंकिंग है, जब चाहे इस्तेमाल किया, और जब चाहे फेंक दिया। यह राजनेता जब अपनों के नहीं हुए तो यह देश के लिए या आम आदमी के लिए क्या सोचेंगे। आज के युग में राजनीति का दूसरा पहलू। आजकल राजनीति का एक दूसरा पहलू भी देखने को मिल रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण कुछ ही दिनों पहले देखने को मिला, जोकि कंगना रनौत के साथ हुआ। मैं इस मुद्दे पर बात भी नहीं करना चाहता कि कौन गलत है और कौन सही। बस मैं यह कहना चाहता हूं, अगर मान लो कंगना रनौत गलत भी थी, तो वहां की सरकार को तब सब कुछ नजर आया जब उसने आवाज उठाने की कोशिश तो तब रातों-रात उनको नजर आता है कि उसका ऑफिस इलेगल था। मैं वहां की सरकार से पूछना चाहता हूं, कि वह उसे पहले सो रही थी? या इसका यह मतलब हुआ जो किसी भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाएगा तो उसके साथ यही होगा। आप आप सोचिए जब एक सेलिब्रिटी के साथ ऐसा हो सकता है तो एक आम आदमी के साथ क्या नहीं हो सकता। रातों-रात नए नियम कानून बन जाते हैं। लेकिन यह नियम कानून अब नहीं बनते जब देश को या किसी समुदाय समाज को इसकी आवश्यकता हो। सही मायनों में तो कहो तो यह अपनी रोटी सेकते हैं चाहे जनता वह कि मर जाए।     
                                                                                                                                                       
  देश के संविधान का लचीलापन। 
 हमारा देश का संविधान जो बनाया गया है उसमें कहीं ना कहीं लचीलापन है। या फिर जो नए नियम कानून बनाए जाते हैं, उसमें भी लचीलापन रह जाता है। वह तो ऐसा है हमारे देश में जब भी कोई नया नियम कानून बनता है तो उसके तोड़ने के कई उपाय बन जाते हैं, अब ऐसा नहीं है कि जो भी बुद्धिजीवी नए नियम कानून बनाते हैं तो उनको इसका ज्ञान नहीं होता, उनको सब कुछ पता होता है। लेकिन अगर वह एक साथ सब कुछ सही करने लगे तो अगली बार सरकार बनाने के लिए कुछ मुद्दे भी तो होने चाहिए। ऐसे बुद्धिजीव को जो नियम कानून बदलने चाहिए वह तो यह बदलते हैं नहीं बल्कि ऐसे और नियम कानून बना डालते हैं जिसमें आम इंसान फसा रहे, आखिर जब अगली बार कोई चुनाव हो तो वही बुद्धिजीवी लोग उन नियम और कानूनों के आधार पर वोट बैंक बनाता है, क्योंकि इनके द्वारा जाल ही ऐसा बनाया जाता है, कि हम इंसान ना चाहते हुए भी वोट उन्हीं को देनी पड़ती है, और इसी तरह ये सरकारें अपनी पकड़ मजबूर कर दी जाती हैं, और देश को राजनीति का एक नया पहलू देखने को मिलता है। जो केवल गंदी राजनीति करते जाते हैं। और एक आम इंसान को सब कुछ पता होने के बावजूद भी बेबस और लाचार देखने को मिलता है। 

 संविधान में बदलाव होना जरूरी है। 
अब आप सोचिए जो संविधान हमारे देश के लिए बनाया गया वह गलत था, मैं यह नहीं कह रहा मैं यह कहना चाह रहा हूं, जिस समय हमारा संविधान बनाया गया उस समय की लोगों की सोच अलग थी, रहन-सहन अलग था, लूटमार, गुंडागर्दी इतनी नहीं थी,लोगों का लोगों का रहन सहन साधारण था। जो भी राजनीति पार्टियां थी अधिकतर देश हित के लिए सोचती जी। लेकिन वह समय गया। तो समय के साथ साथ लोगों की, राजनीतिक पार्टियों की सोच भी बदलती गई, और जो संविधान बनाया गया था, वही अब कुछ हद तक गलत विचारधारा वाले राजनीतिक पार्टियों या आम आदमियों के लिए जोकि गलत विचारधारा रखते हैं उनके लिए एक मजबूत हथियार बन गया है। जिसका वह आज के दौर में इस्तेमाल कर रहे हैं। कोई भी सरकार या नहीं सोच रही की समय के साथ साथ संविधान में भी कुछ बदलाव जरूरी है। लेकिन कोई भी सरकार यह करना नहीं चाहती क्योंकि अगर वह यह सब बदलाव करती हैं। तो उनका वोट बैंकिंग का रास्ता बंद हो जाएग। क्योंकि यही एक वह जरिया है, जिसकी आड़ में कुछ राजनीतिक पार्टियां, या गलत विचारधारा वाले इंसान इसका दुरुपयोग करते हैं 

हमारे देश के नियम कानून।
हमारे देश में ऐसे ऐसे नियम कानून हैं, जिसको कई बार मनन करने से हंसी भी आती है, और देश की दशा देख कर भी रोना आता है। जरा सोचिए जिस देश में हर नौकरी के लिए टेस्ट देने पड़ते हैं, डिग्रीया लेनी पड़ती है। और अपने परिवार को एक अच्छी परवरिश देने के लिए एक इंसान अच्छी शिक्षा प्राप्त करता है। लेकिन देश के नियम और कानून तो देखिए जहां एक और एक आम आदमी अच्छी शिक्षा प्राप्त करके, डिग्रियां प्राप्त करके नौकरी के लिए सरकार से अपील करता है। और उसी सरकार के पास डिग्रीया नहीं होती। मतलब साफ साफ है की सरकार चलाने के लिए कोई भी इंसान आवेदन कर सकता है। और फिर वह इंसान जिसके पास कोई डिग्री भी नहीं है वह हमारे देश के इं डॉक्टर, इंजीनियर,शिक्षक का दिशा निर्देश करेंगे क्या यह उचित है। एक तरफ यह लोग देश को विकसित करने की बात करते हैं और दूसरी तरफ हमारे नियम और कानून इनको रोक देते हैं,तो कहां से देश विकसित होगा। इतना लचीलापन और ही शायद किसी देश के संविधान में होगा। और यही वह वजह है जिसकी वजह से हमारा देश बिछड़ता जा रहा है, आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? हमारा देश कि सरकारें जो संविधान में बदलाव नहीं करना चाहती। क्योंकि इससे उनकी रोजी रोटी बंद हो जाएगी। 

  आम आदमी की गलती। 
हमारे देश में जो भी हो रहा है, कहीं हद तक हम लोग भी जिम्मेदार हैं। क्योंकि हमें अपने देश और किसी और से कोई मतलब ही नहीं, बस जिंदगी कटती जा रही है और हम काटते जा रहे हैं। हमें अपनी नई पीढ़ी की कोई जिम्मेदारी ही नहीं है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन हमारा देश अन्य देशों की तरह जहां आतंकवाद, बेरोजगारी, आदि जैसा मोहल है। कोई भी आवाज उठाने को तैयार नहीं है। भ्रष्टाचार जैसी बीमारी हम जैसे लोगों से ही उत्पन्न होती है, क्योंकि हमें किसी से लड़ना ही नहीं है, बस किसी तरह अपना काम निकाल हम लोग यही सोचते हैं। लेकिन यह छोटी-छोटी गलतियां भ्रष्टाचार, आतंकवाद को बढ़ावा देती हैं, जिसके जिम्मेदार हर कोई इंसान है। हम सोचते हैं एक आदमी के करने से क्या होगा ऐसा ही दूसरा इंसान भी सोचता है, लेकिन एक बार पहल शुरू करके तो देखिए नजारा ही बदल जाएगा, क्योंकि हर इंसान भ्रष्टाचार, आतंकवाद आदि बातों से परेशान है। बस एक दिन इसके साथ लड़के तो देखिए, तुम्हारे साथ और इंसान भी जुड़ जाएंगे बस जरूरत है एक कदम आगे बढ़ाने की, केवल एक बार कोशिश करके तो देखिए घर वापस आकर बहुत सुकून मिलेगा। हम सोचते हैं यह काम वह काम सब सरकार करेगी आखिर सरकार है कौन? जरा सोचिए क्या कोई एक इंसान सरकार हो सकता है अगर हम एकजुट हो जाएं तो हम हैं सरकार हैं। किसी की हिम्मत नहीं होगी जो हमें आगे बढ़ने से रोक सके।

राज नेतावों की सोच। 
हमारे समाज मे राजनीतिक पार्टियों को अच्छी तरह पता है, की आम आदमी की सोच क्या है। और वो उसही का फाइदा उठाते है। वो जानते है की आज की जनता को क्या चाहिए। जैसा कि आप सबको पता है की राजनीतिक पार्टियां या राजनेता अपने वोट बैंक के लिए रेलिया निकालते हैं या किसी सभा का आयोजन करते हैं। और उसमें जो उनके कार्यकर्ता होते हैं वह लोगों को इकट्ठा करते हैं, और उसमें 75% लोग वह होते हैं जिनको देशहित या अपने समाज से कोई मतलब नहीं, उनको बस उस दिन का पैसा चाहिए और साथ में शराब और कबाब चाहिए, और अधिकतर ऐसी रैलियों में घर मुखिया ही जाते हैं, और बाग घर के अन्य सदस्य उन्हीं के कहने पर वोट डालते हैं। मैं सोचते हैं कि घर के मुखिया जो कर रहा होगा वह सही है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। हमें इस सोच से ऊपर उठना होगा और अगर आप सच में अपने परिवार समाज और देशहित चाहते हैं तो इस बारे में सोचिए। हर आदमी की सोच अलग होती है, तो फिर क्यों हम एक आदमी के कहने पर अपनी वोट किसी को भी बिना सोचे समझे ऐसे ही दे दे। अब वक्त आ गया है इस पर मनन करने का अगर आप अपने आने वाली पीढ़ी का भला देखना चाहते हो या आपकी जो जिंदगी बची है उसको खुशहाल देखना चाहते हो तो अपना निर्णय स्वयं ले किसी के बहकावे और एक दिन के लिए (जिसमें लोगों को पैसा और शराब और कबाब मिलता है) जीते हैं उस सोच को बदलो क्योंकि जब किसी की सरकार बन जाती है, तो हम ही वह लोग होते हैं जो सरकार को या राजनेताओं को जिम्मेदार ठहराते हैं, जिम्मेदारों नहीं है बल्कि हम खुद हैं वह तो केवल हमारी कमजोरी का फायदा उठा रहे हैं। सच में अगर जीवन जीना चाहते हो तो अपनी सोच बदलिए, फिर देखिए देखते ही देखते है देश बदल जाएगा।
        जो गलती हमारे पूर्वजों ने की है और उसका खामियाजा ना हमें भोगना ना पड़ रहा है। और हम फिर वही गलती अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए कर रहे हैं। और अगर सच में आप देश और अपने समाज को बदलना चाहते हो तो एक कदम आगे बढ़ा कर तो देखिए चार कदम आपके साथ होंगे और फिर हमारा देश हमारा समाज और राजनीतिक पार्टियों और राजनेताओं की सोच बदलेगी। बस एक बार अपने दिल की सुन कर तो देखिए सारा संसार तुम्हारे साथ होगा।

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