कोरोना काल में राजनीति

 

आजकल कोरॉना के मरीजों में लगातार वृद्धि होती जा रही है। साल 2020 में इतने कोरोना मरीज नहीं थे। जो कि इस साल अभी तक है, और वही कोरोना से मरने वालों की संख्या मे भी बढ़ोतरी होती जा रही है। लेकिन अब तक सरकार की तरफ से कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया। ठोस कदम ना उठाए जाने के पीछे भी कई वजह है चलो इसको समझने की कोशिश करते हैं।

राजनीतिक कारण।


अगर एक विश्लेषण किया जाए तो इसका सबसे बड़ा कारण राजनीति है। जैसा आप जानते हैं कई राज्य में चुनाव का दौर चल रहा है, जिसके कारण वहां की सरकार कोई भी ठोस कदम उठाने को तैयार नहीं क्योंकि चुनाव जो होने हैं। आपने नोटिस किया होगा जिस राज्य में चुनाव खत्म हो चुके हैं वहां थोड़ा बहुत नियम कानून बनाए जा रहे हैं लेकिन जहां अभी चुनाव बाकी हैं या हो रहे हैं वहां कोई नियम कानून नहीं है। इससे साफ पता चलता है हमारी देश की राजनीति और राजनेता राजनीति में कितने अंधे हो चुके हैं। लेकिन यह सारा दोष हम सरकार या राजनेताओं को नहीं दे सकते। क्योंकि उन्हें पता है हमारे देश में लोगों की मानसिकता क्या है उन्हें किस चीज की जरूरत है और उनको किस तरीके से उपयोग करना है वह अच्छी तरह जानते हैं। जिस का वह हमारा फायदा उठाते ही जा रहे हैं।

अब मैं सरकार द्वारा कुछ कोरोना रोकने के लिए कुछ नियम कानून बताने जा रहा हूं। जिसको पढ़ कर आप भी सोचेंगे कि हम लोगों के पास सोचने समझने की क्षमता बच्ची भी है या नहीं। बस जो चाहे मनमानी करता जाए। अब कुछ रूल के बारे में जानते हैं जोकि कई जगह में देखने को मिल रही है।

1 कई जगहों पर रात को 8:00 बजे से लेकर 6:00 बजे तक कर्फ्यू लगाया गया है, तो सोचने वाली बात यह है क्या करोना रात को ही एक्टिव होता है जबकि देखा जाए रात को लोगों का निकलना दिन के मुकाबले काफी कम होता है तो यह कैसा नियम है।

2 चुनाव के दौरान कोई सोशल डिस्टेंसिंग नहीं। मुझे लगता है कोरोना चुनाव से डर लगता है या फिर उसको पहले ही बता दिया जाता है कि यहां पर इतने तारीख से कितनी तारीख तक चुनाव है तो आप यहां नहीं आ सकते हो।

 एक तरफ एक साथ चार आदमी इकट्ठा नह हो सकते

 फैमिली फंक्शन नहीं हो सकता किसी को इसी अर्जेंट काम से बाहर जाना हो तो नहीं जा सकता लेकिन अगर चुनाव है तो कितने भी आदमी आ सकते हैं कोई फर्क नहीं पड़ता, किसी राजनेता के घर में शादी समारोह या बर्थडे पार्टी हो तो उनके लिए कोई कोरोना नहीं लेकिन यही अगर आम आदमी करता है तो उसके लिए कोरोना हाजिर है।

मुझे तो लगता है कोरोना ने भी अब रिश्वत लेना शुरू कर दिया है इसीलिए बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटी, राजनेताओं के घर पर कोरोना नहीं जा सकता इसीलिए तो उनको किसी भी नियम और कानून की जरूरत नहीं पड़ती वह जब चाहे भीड़ इकट्ठा कर सकते हैं जब चाहे पार्टी कर सकते हैं। जब चाहे रैलियां निकाल सकते हैं, यह उनकी मर्जी है।

देश में हॉस्पिटलों की हालत।

अभी हमारा देश कोरोना के संक्रमण से थर्ड स्टेज में भी नहीं पहुंचा है और देश में मरीजों को हॉस्पिटलों में बेड या मेडिकल सुविधाएं नहीं मिल रही है। जो बेसिक जरूरत है होती है किसी भी मरीज के लिए वह चाहिए मेडिसिन हो या बेड हो क्या कोई और चीज उनका अभाव देखने को मिल रहा है।

हर सरकार अपने कार्यकाल में मेडिकल के नाम पर शिक्षा के नाम पर और अन्य न जाने..... के नाम पर बजट पेश करती है। और यह विश्वास भी दिलाया जाता है इस साल शिक्षा में, मेडिकल में, और अन्य ऐसे ही मुद्दों पर हमें बताया जाता है की इस साल कुछ नया होने वाला है। लेकिन जब ग्राउंड रिपोर्ट देखी जाती है तो कुछ नहीं बदलता केवल एक बोर्ड लगाया जाता है। और उस पर पूरा कार्य का विवरण, जैसे कि कितना खर्चा हुआ कहां-कहां खर्चा हुआ और किसके द्वारा करवाया गया यह लिखा हुआ दिखाई देता है। जिसका वास्तविक काम से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं होता।

कोई सरकार कहती है, कि हमने मेडिकल के लिए कितना पर्सेंट का प्रावधान रखा है लेकिन आज तक वह कहीं भी नजर नहीं आखिर यह सारा पैसा ज्यादा कहां है?

चलो इसके बारे में भी बात करें।

हमारे कुछ राज देता तो आए दिन अपना प्रचार प्रसार न्यूज़पेपर मीडिया में करते रहते हैं। नए नए मुद्दे रखते हैं और पुराने भूल जाते हैं। फिर अगले दिन नया प्रचार नया विज्ञापन नए वाले और ग्राउंड रिपोर्ट जीरो।

अब आप यही देख लो जब भी चुनाव आने वाला होता है। तो उसमें हर पार्टी करोड़ों में खर्चा करती है। अपने प्रचार प्रसार से लेकर और आम आदमियों तक कैसे अपना प्रचार प्रसार करना है वहां तक का खर्चा करोड़ों में जाता है। आपने देखा होगा जब भी कोई रेलिया निकलती है चाहे वह किसी भी पार्टी की हो तो उसमें बहुत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता होते हैं। तो आपको क्या लगता है क्या वह सच में कार्य करता है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि उस भीड़ में 50% से ज्यादा लोग केवल पैसों के लिए या फिर आप यह कहे कि शराब और कबाब के लिए जाती है उनको देश या पार्टी से कोई मतलब नहीं होता। आज वो एक पार्टी में दिखते हैं तो दूसरे ही दिन दूसरी पार्टी में तो ऐसे में कहां से देश का भला होगा।

असल में राजनीतिक पार्टियां या राजनेता एक आम आदमी की कमजोरी को अच्छे से समझते हैं जो हमने खुद ही बनाई है और वह उसका पूरा फायदा उठाती है। और पार्टियां मनचाहा खर्चा करती हैं। आखिर इनको यह राइट्स दिए किसने जोकि हमारे ही पैसों का दुरुपयोग करें और हमें जो मूलभूत सुविधाएं होती हैं उनसे भी वंचित रखा जाता है।

सरकार बनने के बाद क्या होता है।

जब कोई भी सरकार बन जाती है और उन्हें पता होता है कि उनका कार्यकाल केवल 5 वर्ष का है। तो आपने कभी सोचा है वह अब इन 5 सालों में क्या-क्या करेंगे चलो इसे समझने की कोशिश करते हैं।

जब कोई भी सरकार बनती है।तो कम से कम 1 साल तो उन्हे काम को समझने में लग जाता है। फिर वह देश या राज्य के बारे में सोचती है। और कुछ जो की एक आम आदमी की मूलभूत सुविधाओं के अनुसार रुप रेखा तैयार करती है लेकिन उसमे मे भी विपक्ष की पार्टियां जब वो काम होने दे। ऐसे करते करते करीब-करीब 10 में से केवल दो-तीन काम हो पाते हैं। और इसके बीच में राजनीतिक पार्टियों को जो नया चुनाव आने वाला है उसकी भी तैयारी करनी पड़ती है। 2 साल पहले से ही प्रचार प्रसार होना शुरू हो जाता है लोगों की कमजोरियां देखी जाती है। कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करना प्रचार प्रसार में लगाना यह सारा काम शुरू हो जाता है। राजनीतिक पार्टियां 5 साल में अपना चुनाव प्रचार करें या काम करें अभी तक तो चुनाव प्रचार करते ही देखा आया है जो काम किया भी गया है उसे वास्तव में काम नहीं कहा जाएगा जब किसी आदमी को इसी पोजीशन में बिठा दिया जाता है तो उसको भी उस पोजीशन की मर्यादा के लिए कुछ करना पड़ता है। और हम लोग समझते हैं किस सरकार ने या उस सरकार ने बहुत बड़ा काम कर लिया। लेकिन आपने सोचा है। आखिर ऐसा क्यों होता जा रहा है इसमें बहुत बड़ी गलती हम लोगों की है जैसे...

आम आदमियों द्वारा बार-बाह एक ही गलती करना.

अक्सर हमने देखा है कई राजनेता जब उन्हें कोई मंत्रिमंडल मिल जाता है ।और रिश्वत लेते हुए या घोटालों में पकड़े जाते हैं। तो फिर जब नया चुनाव होता है हम उसी को जितवा देते हैं जबकि हमें सब कुछ पता होता है आखिर ऐसा क्यों। क्योंकि हमें फ्री में सब कुछ मिल जाए यह चाहते हैं हमें अपने देश की तो छोड़ो अपने बच्चों की भविष्य तक की चिंता नहीं है।

अगर आज कोई एक हम इंसान से पूछा जाए जो थोड़ा इमानदार हो और उससे पूछा जाए कि वह राजनीति में जाना चाहता है तो वह मना कर देगा और उसका एक ही जवाब होगा कि राजनीति में जाना......... राजनीति में भी कई अच्छे लोग हैं जिनकी वजह से एक आम इंसान की उम्मीदें परी होती है लेकिन परिस्थितियां ऐसी है कि अगर वह पूरी ईमानदारी से काम करें तो शायद उसको ही पार्टी से बाहर निकाल दिया जाए तो अभी देखा जाए तो राजनीति कैसा दलदल है अगर आपको उसने जाना है तो थोड़ा बहुत गंदा होना पड़ेगा। क्योंकि राजनीति में जो कचरा सालों से भरता आ रहा है और राजनीति का जो दूसरा ही पहलू हमें नजर आता है वह कुछ सालों में नहीं बदलने वाला उसके लिए चाहिए की राजनीति में भी कुछ इमानदार लोग हैं और खासकर जो आम जनता है वह सोच समझकर अपना वोट दें। राजनीति का स्तर आपने कई बार देख चुके हैं किस हद तक गिर चुका है वोट लेने के लिए कोई अपनी टांग तुड़वाता हैं तो कोई अपने आप को ही थप्पड़ मरवाता है। जो इंसान यह सब कुछ करवा सकता है तो आप उससे क्या उम्मीद रख सकते हो।

निष्कर्ष।

कोरोना ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। जैसे कि हमारी सरकार या हमारे देश को पता है कि हमारे देश की जनसंख्या क्या है और हमारा मेडिकल या शिक्षा में कौन सा स्थान है तब भी हमारी समझ में यह बात नहीं आई कि कौन सी चीजों की प्राथमिकता पहले होनी चाहिए बस हर किसी को अपनी सरकार के 5 साल पूरे करने हैं। हर कोई मेडिकल में हमारे देश का 112 स्थान है और जनसंख्या में नंबर दो पर तो इसमें एक आम इंसान को भी समझ में आता है कि हमारे देश को किन-किन मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है। शायद अब हमारे सरकार को या राजनीतिक पार्टियों को महसूस हो पाए की आम जनता को क्या चाहिए।

हमें भी कुछ सोचना होगा फ्री में मिलने वाली चीज से कोई फायदा नहीं आखिर जा तो हमारे ही जेब से रहा है और ये कुछ नही केवल वोट बैंकिंग के लिए हैं।

अगर अपने देश या अपने बच्चों का भविष्य बनाना है तो सबसे पहले हमे जागरूक होना होगा। और तब ही हम अपने बच्चों को सही शिक्षा दे सकते है। और उन्हें सही और गलत का फर्क बता पाएंगे।

मैं ये भी मानता हूं 50%से ज्यादा लोगो को इन सारी बातों का पता पहले से है। लेकिन समझने की कोशिश करे आम जनता को ऐसे उलझा दिया गया है कि वह चाह कर भी कुछ नही कर सकता। 

बस अब जरूरत है अपना नजरिया बदलने का। गलत का विरोध करो विरोध करने के लिए भीड़ की जरूरत नहीं बस थोड़ा साहस की जरूरत है।अपने लिए नही तो कम से कम अपनी आने वाली पीढ़ी के बारे में तो सोचो।

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